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Showing posts from September, 2018

कारगिल युद्ध में लड़ने वाले वो सैनिक जो अब असम में एनआरसी से बाहर हैं

वैसे तो ईस्ट इंडिया कंपनी  में भारत में आने के बाद लगातार जीत हासिल करती चली गई और उस दौरान दुनिया के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि एक कंपनी ने एक देश पर कब्ज़ा कर लिया था. लेकिन इस सफ़र के दौरान एक मोड़ पर उन्हें ऐसी शर्मनाक हार मिली थी जिसने कंपनी का वजूद ही ख़तरे में डाल दिया था. बाद में कंपनी ने अपने माथे से ये दाग़ धोने की पुरज़ोर कोशिश की. यही वजह है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि सिराजुद्दौला और टीपू सुल्तान पर जीत हासिल करने से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने औरंग ज़ेब आलमगीर से भी जंग लड़ने की कोशिश की थी लेकिन इसमें बुरी हार का सामना करने के बाद अंग्रेज़ों के दूतों को हाथ बांधकर और दरबार के फ़र्श पर लेटकर मुग़ल बादशाह से माफ़ी मांगने पर मजबूर होना पड़ा था. यह क़िस्सा कुछ यूं है कि अंग्रेज़ों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के गठन के बाद भारत के विभिन्न इलाक़ों में अपने व्यावसायिक केंद्र स्थापित करके व्यवसाय शुरू कर दिये थे. इन इलाक़ों में भारत के पश्चिमी तट पर सूरत, बम्बई और पूर्व में मद्रास और कलकत्ता से 20 मील दूर गंगा नदी पर स्थित बंदरगाह हुगली और क़ासिम बाज़ार अहम थे. ...

रेलवे के गेटमैन पर बदमाशों ने किया धारदार हथियार से हमला, उसके हाथ काटे

नई दिल्ली : रेल वे के दिल्ली - अम्बाला सेक्शन पर पड़ने वाले स्टेशन नरेला और राठधना के बीच गेट संख्या 19 पर तैनात गेट मैन पर रविवार रात बदमाशों ने हमला किया. बदमाशों ने गेटमैन के दोनों हाथ काट दिए और उसे मौके पर छोड़ कर फरार हो गए. हमले के पीछे कारण क्या थे इसका अब तक पता नहीं लग सका है. रेलवे की ओर से पुलिस में मामला दर्ज करा दिया गया है. गेट मैन पर हमले की खबर मिलने के बाद को ई भी रेल कर्मी उस गेट पर काम करने को तैयार नहीं है. ऐसे में रेलवे को मजबूरी में इस गेट को अस्थाई तौर पर बंद करना पड़ा है. इस गेट से रोज हजारों की संख्या में आम लोग गुजरते हैं. ड्यूटी के दौरान हुआ हमला रेलवे की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि गेट मैन कुं दन कुमार गेट संख्या 19 पर तैनात थे. इनकी ड्यूटी राहत 12 बजे से सुबह 08 बजे तक थी. ड्यूटी के दौरान रात लगभग 0.30 से 01 बजे के बीच तीन अज्ञान व्यक्तियों ने कुंदन कुमार सिंह और उनके साथी चंदन कुमार सिंह पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया. इस हमले में कुंदन सिंह के दोनों हाथ कट गए और वो मौके पर ही गिर पड़े. उन्हें इलाज के लिए अस...

气候公平还是气候领袖?

嘉宾作者 :那拉荣泰        各国就气候责任的扯皮战早已不是新闻。德班会议拉开帷幕之际,那拉荣泰就此采访了全球气候行动联盟( )执行总干事凯莉·瑞格( ),她对“气候公平”和中国该怎么做,发表了看法。        那拉荣泰:很多人在呼吁“欧盟-基础四国”联手拯救《京都议定书》,你认为,他们如何才能往那个方向前进?        凯莉·瑞格: 现在非常清楚地是,《京都议定书》附件一的部分国家不会继续和我们一块儿了。此刻,欧盟的作用显然极为关键。但是《京都议定书》中如果只有欧盟受到约束,那也是不公平的。这正是欧盟现在的担心。因 此,欧盟是否 继续参与第二承诺期,取决于其他国家一定形式的支持。        现在的问题是,我们如何可以让主要发展中国家也参与进来。欧盟想要赢得中国的支持,想要和中国共同加强《京都议定书》。因此,中国可以将国内立法做出的减排承诺,以某种方式写入第二承诺期,以保证它能履行兑现。那样的话,我们就可以有一个总体方向和路径,继续开展工作。        但如果中国始终以“自身条件不成熟”为由,坚持不受《京都议定书》约束,那么是在变相支持美国的立场。我想,这不符合任何一方的 利益。        那拉荣泰:你如何看待中美之间现在绿色产品贸易战,以及欧盟对航空碳排放的管制措施?         凯莉·瑞格: 我觉得美国的措施同样非常荒唐。美国一方面抱怨中国在气候环境上没有采取足够的行动,而另一方面又起诉中国的绿色产业发展得太快,而抛下美国企业。我认为,各国应该携手合作,来发展绿色产业,而不是抱怨、起诉他国的“积极行动”。        对于欧盟的航空碳排放 交易( ),首先 欧盟在很多年前就通过了相关立法,这并不是一个新举措;第二,对于那些乘国际航班的人而言,几美元费用是可以接受的。所有能够减少碳排放的措施,都值得我们尝试。        另外我认为,“共同...