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محمد بن سلمان يحذر من أزمة نفط عالمية إذا لم يتحرك العالم "لردع إيران"

وقُتل خاشقجي في قنصلية بلاده في تركيا في الثاني من أكتوبر/تشرين الأول 2018. وفي حوار مع برنامج إخباري تبثه شبكة سي بي إس أذيع يوم أمس الأحد، قال بن سلمان: "أتحمل المسؤولية كاملة بصفتي قائدا في السعودية، خاصة وأنها (عملية القتل) تمت على أيدي أفراد يعملون في الحكومة السعودية". لكنه استدرك منكرا إعطاء الأوامر بقتل خاش قجي بشكل مباشر، أو حتى أنه كان على علم بالأمر في حينه . ووصفت السلطات السعودية عملية القتل بـ "المارقة"، وأحالت أحد عشر شخصا إلى المحاكمة. كما أظهر ولي العهد رغبة في إجراء محادثات من أجل حلّ سياسي ل لحرب الأهلية المشتعلة في اليمن، حيث تنخرط قوات حكومية مدعومة من ائتلاف تقوده السعودية في قتال ضد مسلحي جماعة الحوثي المدعومة من إيران. أنكرت إيران أي دور لها في الهجمات على منشآت نفطية سعودية، والتي أثرت على نحو خمسة في المئة من مخزون النفط العالمي، وتسببت في ارتفاع أسعاره. لكن بن سلمان قال: "إذا لم يتحرك العالم بشكل قوي وحازم لردع طهران، ف سنرى مزيدا من عمليات التصعيد كفيلة بتهديد مصالح عالمية". وأضا ف: "إمدادات النفط ستتعطل، وستق...

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

कह ये भी सकते हैं कि इसी दायरे में वह कालाधन भी खपा जो भ्रष्टाचार से जुड़ा था. यानी सरकारी बाबुओं से लेकर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की वह रकम जो सरकार की नज़र में नहीं थी, उसने एक समानांतर अर्थव्यवस्था ऐसी बना ली थी जिसने 2008-09 में भी भारत को दुनिया में आई मंदी की चपेट में नहीं आने दिया. इसलिए सार्वजनिक सेक्टर हो या निजी सेक्टर, घाटा या डूबने के हालात इस दौर में इक्का-दुक्का ही आए. ये सिलसिला 2010 तक जारी रहा, इससे मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधार में कुछ रुकावट मनरेगा और शिक्षा की गारंटी सरीखी योजनाओं से इसलिए आई क्योंकि वै कल्पिक खाका कैसे खड़ा हो, इस पर काम नहीं किया गया था . यानी मनरेगा से ग्रामीण भारत पर ख़र्च की जाने वाली रकम और शिक्षा की गारंटी योजना को लागू किए जाने की प्रकिया से निजी क्षेत्र को अलग रखा ग या जबकि सीएसआर की रकम और शिक्षा में निजी पूंजी के ज़रिये विस्तार दिया जा सकता था. लेकिन फिर भी ध्यान दें तो 2014 में मनमोह न सिंह की हार के बाद मोदी सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनिया घाटे में नहीं मिली थीं. 2014 में निजी या सार्वजनिक क्षेत्र कोई बहुत फ़ाय दे ...