प्रेस रिव्यूः गहराता जा रहा है सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विवाद
के अनुसार केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सबरीमला मंदिर के पुजारी
को बातचीत का न्योता दिया था, लेकिन मंदिर के पुजारी ने मुख्यमंत्री से
मिलने और बात करने से इंकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में जाने की इजाज़त दी थी. लेकिन राज्यभर में इस फ़ैसले के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे.
मुलायाम के आवाएक आरटीआई में यह जानकारी प्राप्त हुई है. पिछले 14 सालों से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास के रख रखाव के लिए जो फ़ंड जारी किया गया उसमें से सबसे अधिक हिस्सा मुलायम सिंह के बंगले के लिए जारी हुआ.
इन 14 सालों में मुलायम सिंह, मायावती और अखिलेश यादव राज्य के मुख्यमंत्री रहे. पिछले साल बीजेपी की सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.
ख़बर के मुताबिक इन 14 सालों में राज्य सरकार की ओर से कुल 4 करोड़ रुपए पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों के रख रखाव के लिए जारी किए गए जिसमें मुलायम, कल्याण सिंह, एन डी तिवारी, राजनाथ सिंह और मायावती के बंगले शामिल हैं.
इन 4 करोड़ में से मुलायम के बंगले के लिए ही 3.22 करोड़ रुपए जारी हुए हैं.
स के लिए जारी हुआ 79 फ़ीसदी फ़ंड
उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास के लिए निर्धारित सरकारी फ़ंड में से 79 प्रतिशत हिस्सा अकेले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आवास के लिए जारी किया गया.
जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव के
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में होने वाली एक रामलीला में उस वक़्त अजीब हालात पैदा हो गए जब रामलीला में राम और लक्ष्मण बने दोनों किरदार धरने पर बैठ गए.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार वाराणसी में प्रसिद्ध लात भैरों रामलीला का मंचन हो रहा था, इसमें धनसेरा तालाब के पास राम-केवट प्रसंग दर्शाया जा रहा था, लेकिन तालाब में मौजूद गंदे पानी और उसकी बदबू के चलते कलाकारों की तबीयत खराब होने लगी और वे उल्टियां करने लगे.
इसके बाद राम और लक्ष्मण का किरदार निभा रहे दोनों कलाकार
तुर्की की सत्ताधारी एके पार्टी के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि सऊदी अरब के लापता पत्रकार ज़माल ख़ाशोज्जी की हत्या इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में किए जाने के सबूत तुर्की के जांचकर्ताओं को मिले हैं.
शनिवार को तुर्की के दो अधिकारियों ने कहा था कि हत्या सोच समझकर की गई है और ख़ाशोज्जी का शव दूतावास से हटा दिया गया है.
जमाल ख़ाशोज्जी मंगलवार को अपने तलाक़ के दस्तावेज़ों लेने के लिए दूतावास गए थे और तब से उन्हें नहीं देखा गया है.
तुर्की की पुलिस ने उनकी दूतावास के भीतर हत्या किए जाने की बात तो की है लेकिन अपने दावों के समर्थन में अभी तक कोई सबूत पेश नहीं किया है.
दूसरी ओर सऊदी के अधिकारियों ने सभी आरोपों को झूठा बताया है.
शनिवार को इस्तांबुल में सऊदी के कौंसुल जनरल मोहम्मद अल ओतैबी ने कहा, "मैं इसकी पुष्टि करता हूं कि नागरिक जमाल न ही सऊदी दूतावास में हैं और न ही सऊदी अरब में हैं और हमारा दूतावास उन्हें खोजने के प्रयास कर रहा है और उन्हें लेकर चिंतित है."
ख़ाशोज्जी सऊदी अरब के मशहूर पत्रकार हैं और इन दिनों में अमरीका में रहकर अख़बार द वाशिंगटन पोस्ट के लिए लिखते थे. वे सऊदी के शाही परिवार और ख़ासतौर पर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के प्रख़र आलोचक थे.
वाशिंगटन पोस्ट के राजनीतिक संपादक अली लोपेज़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि ख़ाशोज्जी अपनी जान पर ख़तरे की बात किया करते थे.
उन्होंने कहा, "वो वहां रह रहे अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे और कहा था कि बोलते रहने के लिए उन्हें देश छोड़ना होगा. वो इस बात को समझते थे कि उनके विचार सऊदी अरब के सबसे शक्तिशाली लोगों को चुनौती दे रहे हैं. मुझे लगता है कि वो हमेशा सोच समझकर ख़तरा उठाते थे."
वहीं पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली एक समिति से जुड़े रॉबर्ट माहनी का कहना है कि शाही परिवार की आलोचना करने वाला कोई पत्रकार सुरक्षित नहीं है.
उन्होंने कहा, "क्राउन प्रिंस ने स्पष्ट कर दिया है कि वो नहीं चाहते कि कोई सऊदी शाही परिवार, उसके वित्तीय मामलों या भ्रष्टाचार के बारे में कुछ लिखे या पड़ताल करे. हाल में कई सऊदी पत्रकारों और ब्लॉगरों को जेल में डाला गया है."
जमाल ख़ाशोज्जी का मामला तुर्की और सऊदी अरब के रिश्तों में भी तनाव बढ़ा सकता है.
तुर्की के अधिकारियों ने बेहद गंभीर आरोप सऊदी अरब पर लगाए हैं लेकिन कोई ठोस सबूत अभी पेश नहीं किए हैं.
अगर तुर्की के आरोप सही साबित हुए तो दोनों देशों के रिश्ते हाल के दशकों में सबसे तनावपूर्ण स्तर पर होंगे.र्की के अधिकारियों का कहना है कि ख़ासोज्जी का क़त्ल दूतावास के भीतर ही हुआ है और उनका शव वहां से हटा दिया गया.
जांचकर्ताओं के मुताबिक एक 15 सदस्यीय दल मंगलवार को दूतावास पहुंचा था और उसी दिन सऊदी की राजधानी रियाद लौट गया था.हीं तुर्की-अरब मीडिया एसोसिएशन के प्रमुख तूरान किसलागज़ी ने कहा है कि दूतावास की सुरक्षा कर रहे तुर्की के सुरक्षाबलों के सीसीटीवी में ख़ासोज्जी दूतावास से बाहर जाते नहीं दिख रहे हैं.
हालांकि उनका ये भी कहना था कि राजयनिक वाहन ज़रूर दूतावास से आए-गए हैं. वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तेयेप अर्दोआन ने रविवार को कहा है कि तुर्की के अधिकारियों की जांच पूरी होने का इंतज़ार कर रहे हैं.ऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बुधवार को ब्लूमबर्ग से कहा है कि तुर्क अधिकारियों दूतावास में आकर जांच करने के लिए स्वागत है क्योंकि हमारे पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है.
प्रिंस ने कहा है कि सऊदी के लोग भी जानना चाहते हैं कि आख़िर हुआ क्या है. जब प्रिंस से पूछा गया कि क्या ख़ासोज्जी पर सऊदी अरब में कोई मुक़दमा चल रहा है तो उन्होंने कहा कि पहले ये जानना ज़रूरी है कि वो हैं कहां.
सऊदी अरब और तुर्की के रिश्ते इस समय बहुत अच्छे नहीं है. क़तर को तुर्की के समर्थन, ईरान के साथ बेहतर होते तुर्की के रिश्तों और सऊदी अरब के मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रतिबंधित करने की वजह से दोनों देशों के बीच पहले से ही कुछ तनाव है.
लेकिन अब तुर्की ने बहुत बड़ा आरोप सऊदी पर लगाया है. हालांकि तुर्क अधिकारियों ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है. हालांकि इतना बड़ा आरोप ज़रूर किसी आधार पर ही लगाया गया होगा.
लेकिन तुर्की और सऊदी के रिश्ते बेहद अहम भी हैं और सिर्फ़ किसी अफ़वाह पर उन्हें दांव पर नहीं लगाया जा सकता. हालांकि यदि ख़ासोज्जी के क़त्ल की बात सही साबित हुई तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव आ सकता है.
मंच पर ही धरने पर बैठ गए. ख़बर में बताया गया है कि लात भैंरो रामलीला 16वीं सदी के मध्य से चली आ रही है.
पहले दौर का मतदान सोमवार को होना है. हालांकि घाटी में चुनाव जैसी कोई रंगत दिखाई नहीं दे रही.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार लगभग एक दशक से लंबे वक़्त के बाद जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन ना दीवारों पर उम्मीदवारों के बैनर पोस्टर लगे हैं और ना ही लोगों को यह पता है कि उनके उम्मीदवार कौन हैं.
चार चरण में होने वाले इन चुनावों के पहले चरण में आज कश्मीर के आठ ज़िलों में वोट डाले जाने हैं. पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस इन चुनावों में हिस्सा नहीं ले रही हैं. ऐसे में सीधा मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और स्वतंत्र उम्मीदवारों के बीच है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में जाने की इजाज़त दी थी. लेकिन राज्यभर में इस फ़ैसले के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे.
मुलायाम के आवाएक आरटीआई में यह जानकारी प्राप्त हुई है. पिछले 14 सालों से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास के रख रखाव के लिए जो फ़ंड जारी किया गया उसमें से सबसे अधिक हिस्सा मुलायम सिंह के बंगले के लिए जारी हुआ.
इन 14 सालों में मुलायम सिंह, मायावती और अखिलेश यादव राज्य के मुख्यमंत्री रहे. पिछले साल बीजेपी की सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.
ख़बर के मुताबिक इन 14 सालों में राज्य सरकार की ओर से कुल 4 करोड़ रुपए पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों के रख रखाव के लिए जारी किए गए जिसमें मुलायम, कल्याण सिंह, एन डी तिवारी, राजनाथ सिंह और मायावती के बंगले शामिल हैं.
इन 4 करोड़ में से मुलायम के बंगले के लिए ही 3.22 करोड़ रुपए जारी हुए हैं.
स के लिए जारी हुआ 79 फ़ीसदी फ़ंड
उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास के लिए निर्धारित सरकारी फ़ंड में से 79 प्रतिशत हिस्सा अकेले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आवास के लिए जारी किया गया.
जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव के
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में होने वाली एक रामलीला में उस वक़्त अजीब हालात पैदा हो गए जब रामलीला में राम और लक्ष्मण बने दोनों किरदार धरने पर बैठ गए.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार वाराणसी में प्रसिद्ध लात भैरों रामलीला का मंचन हो रहा था, इसमें धनसेरा तालाब के पास राम-केवट प्रसंग दर्शाया जा रहा था, लेकिन तालाब में मौजूद गंदे पानी और उसकी बदबू के चलते कलाकारों की तबीयत खराब होने लगी और वे उल्टियां करने लगे.
इसके बाद राम और लक्ष्मण का किरदार निभा रहे दोनों कलाकार
तुर्की की सत्ताधारी एके पार्टी के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि सऊदी अरब के लापता पत्रकार ज़माल ख़ाशोज्जी की हत्या इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में किए जाने के सबूत तुर्की के जांचकर्ताओं को मिले हैं.
शनिवार को तुर्की के दो अधिकारियों ने कहा था कि हत्या सोच समझकर की गई है और ख़ाशोज्जी का शव दूतावास से हटा दिया गया है.
जमाल ख़ाशोज्जी मंगलवार को अपने तलाक़ के दस्तावेज़ों लेने के लिए दूतावास गए थे और तब से उन्हें नहीं देखा गया है.
तुर्की की पुलिस ने उनकी दूतावास के भीतर हत्या किए जाने की बात तो की है लेकिन अपने दावों के समर्थन में अभी तक कोई सबूत पेश नहीं किया है.
दूसरी ओर सऊदी के अधिकारियों ने सभी आरोपों को झूठा बताया है.
शनिवार को इस्तांबुल में सऊदी के कौंसुल जनरल मोहम्मद अल ओतैबी ने कहा, "मैं इसकी पुष्टि करता हूं कि नागरिक जमाल न ही सऊदी दूतावास में हैं और न ही सऊदी अरब में हैं और हमारा दूतावास उन्हें खोजने के प्रयास कर रहा है और उन्हें लेकर चिंतित है."
ख़ाशोज्जी सऊदी अरब के मशहूर पत्रकार हैं और इन दिनों में अमरीका में रहकर अख़बार द वाशिंगटन पोस्ट के लिए लिखते थे. वे सऊदी के शाही परिवार और ख़ासतौर पर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के प्रख़र आलोचक थे.
वाशिंगटन पोस्ट के राजनीतिक संपादक अली लोपेज़ ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि ख़ाशोज्जी अपनी जान पर ख़तरे की बात किया करते थे.
उन्होंने कहा, "वो वहां रह रहे अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे और कहा था कि बोलते रहने के लिए उन्हें देश छोड़ना होगा. वो इस बात को समझते थे कि उनके विचार सऊदी अरब के सबसे शक्तिशाली लोगों को चुनौती दे रहे हैं. मुझे लगता है कि वो हमेशा सोच समझकर ख़तरा उठाते थे."
वहीं पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली एक समिति से जुड़े रॉबर्ट माहनी का कहना है कि शाही परिवार की आलोचना करने वाला कोई पत्रकार सुरक्षित नहीं है.
उन्होंने कहा, "क्राउन प्रिंस ने स्पष्ट कर दिया है कि वो नहीं चाहते कि कोई सऊदी शाही परिवार, उसके वित्तीय मामलों या भ्रष्टाचार के बारे में कुछ लिखे या पड़ताल करे. हाल में कई सऊदी पत्रकारों और ब्लॉगरों को जेल में डाला गया है."
जमाल ख़ाशोज्जी का मामला तुर्की और सऊदी अरब के रिश्तों में भी तनाव बढ़ा सकता है.
तुर्की के अधिकारियों ने बेहद गंभीर आरोप सऊदी अरब पर लगाए हैं लेकिन कोई ठोस सबूत अभी पेश नहीं किए हैं.
अगर तुर्की के आरोप सही साबित हुए तो दोनों देशों के रिश्ते हाल के दशकों में सबसे तनावपूर्ण स्तर पर होंगे.र्की के अधिकारियों का कहना है कि ख़ासोज्जी का क़त्ल दूतावास के भीतर ही हुआ है और उनका शव वहां से हटा दिया गया.
जांचकर्ताओं के मुताबिक एक 15 सदस्यीय दल मंगलवार को दूतावास पहुंचा था और उसी दिन सऊदी की राजधानी रियाद लौट गया था.हीं तुर्की-अरब मीडिया एसोसिएशन के प्रमुख तूरान किसलागज़ी ने कहा है कि दूतावास की सुरक्षा कर रहे तुर्की के सुरक्षाबलों के सीसीटीवी में ख़ासोज्जी दूतावास से बाहर जाते नहीं दिख रहे हैं.
हालांकि उनका ये भी कहना था कि राजयनिक वाहन ज़रूर दूतावास से आए-गए हैं. वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तेयेप अर्दोआन ने रविवार को कहा है कि तुर्की के अधिकारियों की जांच पूरी होने का इंतज़ार कर रहे हैं.ऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बुधवार को ब्लूमबर्ग से कहा है कि तुर्क अधिकारियों दूतावास में आकर जांच करने के लिए स्वागत है क्योंकि हमारे पास छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है.
प्रिंस ने कहा है कि सऊदी के लोग भी जानना चाहते हैं कि आख़िर हुआ क्या है. जब प्रिंस से पूछा गया कि क्या ख़ासोज्जी पर सऊदी अरब में कोई मुक़दमा चल रहा है तो उन्होंने कहा कि पहले ये जानना ज़रूरी है कि वो हैं कहां.
सऊदी अरब और तुर्की के रिश्ते इस समय बहुत अच्छे नहीं है. क़तर को तुर्की के समर्थन, ईरान के साथ बेहतर होते तुर्की के रिश्तों और सऊदी अरब के मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रतिबंधित करने की वजह से दोनों देशों के बीच पहले से ही कुछ तनाव है.
लेकिन अब तुर्की ने बहुत बड़ा आरोप सऊदी पर लगाया है. हालांकि तुर्क अधिकारियों ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है. हालांकि इतना बड़ा आरोप ज़रूर किसी आधार पर ही लगाया गया होगा.
लेकिन तुर्की और सऊदी के रिश्ते बेहद अहम भी हैं और सिर्फ़ किसी अफ़वाह पर उन्हें दांव पर नहीं लगाया जा सकता. हालांकि यदि ख़ासोज्जी के क़त्ल की बात सही साबित हुई तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव आ सकता है.
मंच पर ही धरने पर बैठ गए. ख़बर में बताया गया है कि लात भैंरो रामलीला 16वीं सदी के मध्य से चली आ रही है.
पहले दौर का मतदान सोमवार को होना है. हालांकि घाटी में चुनाव जैसी कोई रंगत दिखाई नहीं दे रही.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार लगभग एक दशक से लंबे वक़्त के बाद जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन ना दीवारों पर उम्मीदवारों के बैनर पोस्टर लगे हैं और ना ही लोगों को यह पता है कि उनके उम्मीदवार कौन हैं.
चार चरण में होने वाले इन चुनावों के पहले चरण में आज कश्मीर के आठ ज़िलों में वोट डाले जाने हैं. पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस इन चुनावों में हिस्सा नहीं ले रही हैं. ऐसे में सीधा मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और स्वतंत्र उम्मीदवारों के बीच है.
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